www. बत्तख. com और खबरों की पक-पक

बिहारशरीफ।अब बहुत हो गया,कइयों ने अपनी टीआरपी बटोर ली।आज www. बत्तख. com का जिक्र होना चाहिए भारत में।पूरा भारत को पकपक करना सीखा दिया है।किसकी बीबी कब तलाक लेगी,नीतीश कुमार कब भाजपा में जाएंगे,अभी अभी,टूट सकता है गठबंधन,ऐसी तमाम खबरों के सनसनीखेज तरीके से परोसने के चक्कर मे हिंदी पत्रकारिता अपने भटियारेपन से गुज़र रही है।खबर का असर समाज पर क्या पड़ सकता है इससे कोई लेना देना नहीं है।बस कुछ भी लिख दो बाकि अपना दिमाग कुलबुलाने के लिए आप सोचते रहिए। क्या टीआरपी सिर्फ फिजूल की खबरों से आएगी ? पता नहीं इनलोगों के पास सूत्र कौन सा है जो दिन भर जिस पर्दाफाश करते रहते हैं।सोशल मीडिया पर आजकल हर कोई पत्रकार है।थोड़ा गंभीरता लाइए साहब।मैं मानता हूं कि सोशल मीडिया के सही ढंग से यूज़ करने वाले पत्रकार या व्यक्ति के कारण सच्चाई आती है।गुटबाज़ी और गैरपेशेवर होती हिंदी पत्रकारिता ने एक दूसरे का कितना नुकसान किया है। एक सर्वे हो जाएं। सबके आंसूओं से सर्वे के सवाल भींग जाएंगे। कई बार सोशल मीडिया में डाली गयी गलत पोस्ट,छेड़-छाड़ कर डाले हुए वीडियो आदि से समाज के विभिन्न समुदायों के बीच तनाव भी उत्पन्न हो जाता है। लेकिन अगर सोशल मीडिया के वर्तमान रूप पर वृहद दृष्टि डाली जाये तो पूरा मीडिया विभिन्न विचारधाराओं के समर्थक व विरोधी व्यक्तियों के विभिन्न खेमों में बंटा हुआ नजर आता है,विशेषकर राजनीतिक विचारधाराओं व नेताओं के समर्थक या विरोधियों के रूप में। जिस प्रकार से बाहरी दुनिया में राजनीतिक नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं,मीडिया चैनलों पर होने वाली गरमागरम बहसों के दौरान विभिन्न दलों और विचारधाराओं के समर्थक एक दूसरे से भिड़ते नजर आते हैं वैसा ही हाल यहाँ भी देखने को मिलता है।बस फर्क इतना है कि यहाँ शारीरिक हाथापाई व एक दूसरे पर अच्छे-बुरे शब्दों से किये जा रहे तीखे प्रहारों को प्रत्यक्ष देखा-सुना नहीं जा सकता लेकिन गाली गलौज, भद्दे,अपमानजनक व अन्य तरह के अपशब्दों का प्रयोग ठीक उसी तरह देखा जा सकता है।चंद अँगुलियों पर गिने जा सकने वाले तटस्थ रूप से अपने विचार प्रकट करने वाले व्यक्तियों को छोड़ दिया जाय तो अमूमन हर व्यक्ति अपनी विचारधारा से इतर विचारधारा के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित नजर आता है।अगर आपके विचार दूसरे की विचारधारा से मेल नहीं खाते तो तत्काल आपको उसका विरोधी या किसी विचारधारा विशेष का भक्त या दलाल साबित कर दिया जाएगा और आपकी पोस्ट पर बिना कुछ सोचे समझे निंदनीय अपशब्दों का प्रयोग किया जा सकता है। कई बार तो अश्लील गालियाँ तक पढ़ने को मिल जाती हैं।यह आवश्यक व संभव भी नहीं है कि हर व्यक्ति हर किसी के सभी विचारों से सहमत हो लेकिन अगर असहमति व्यक्त करना हो तो शालीन व मर्यादित शब्दों में व्यक्त की जा सकती है। हर किसी के हर विचार पर अपनी प्रतिक्रया व्यक्त करना जरूरी भी नहीं है।सोशल मीडिया आगे आने वाले समय में क्या रूप धारण करेगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन इसके वर्तमान स्वरूप में इसके द्वारा व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में किसी रचनात्मक परिणाम की उम्मीद करना बेमानी होगा,उलटे इसके द्वारा आपसी द्वेष, उत्तेजना व एक दूसरे के प्रति असहिष्णुता का वातावरण निर्मित करने में नकारात्मक योगदान अवश्य हो रहा है।

Top
Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.