ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन रद्द@माल महराज का और मिर्जा खेले होली…

-जिसके राज में रहना है उसके राज में रहिए और छप्पड़ में हाथी बुले,हां जी, हां जी कहिए’।

रजनीकांत। कैसे हुआ,क्यों हुआ,यह करण बहुत स्पष्ट तो नहीं हो पाया लेकिन अचानक से राजगीर में आयोजित होने वाले देश के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन को अपरिहार्य कारण बताकर रद्द कर देना काफी अजीब सा लगा। बस,एक फोन और सभी खत्म। करोड़ों का खर्च,व्यवस्था सब धरि की धरि राह गयी। सीएम से लेकर डीएम तक तैयारी में लगे थे। बिहार ने तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। खुद एसपी सुधीर कुमार पोरिका से बात हुई कि सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहेगी। मुझे 3 बजे तक इस बात का इल्म नहीं था कि केंद्र सरकार कुछ और ही खिचड़ी तैयार कर रही है।मैं खुद राजगीर जाकर तैयारी देखा था। इतना बढ़िया इंतिज़ाम बिहार सरकार ने किया था कि इस सम्मेलन के बाद बिहार की एक अलग इमेज ब्रांडिंग होती। मान लिया कि दिल्ली में अचानक से बैठक बुलानी पड़ी। सब कुछ होने देते।फ्लाइट का तो जमाना था।बीच मे कभी भी दो दिन के अंदर बैठक में शामिल हो जाते। इतने रुपये की नुकसान की कीमत केंद्र के नज़र में कुछ नहीं थी। खाना, पीना,रहना,सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी सब हो चुकी थी। बाहर से कारीगर आकर दिन रात लगे थे।पत्रकार भी काफी उत्साहित थे। बिहार पूरी तरह से तैयार था। स्टेट लेवल से लेकर जिला लेवल तक के पदाधिकारियों ने अपना 100 परसेंट दिया लेकिन वो कहावत है न कि माल महराज का और मिर्जा खेले होली,वही कल चरितार्थ हुआ। अब इस पर कोई बोलेगा नहीं। यह तो सही में गलत हुआ।दो दिवसीय सम्मेलन में बिजली और अक्षय र्जा से संबद्ध विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा एवं संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जानी थी।। इसमें राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय र्जा मंत्रियों और सचिवों के अलावा दोनों विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भाग लेना था।सम्मेलन में जिन मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना थी, उसमें सौभाग्य प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना, दिसंबर 2018 तक सभी घरों को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य, प्रीपेड स्मार्ट मीटर, 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति, अक्षय र्जा बाध्यता आरपीओ का अनुपालन, बिजली खरीद समझाौता के हस्ताक्षर और उसका सम्मान, र्जा संरक्षण, अक्षय र्जा आदि विषय शामिल था लेकिन यह दुर्भाग्य है कि देश के राजा का फरमान था तो विरोध कौन करता। एक और कहावत याद आ गयी ‘जिसके राज में रहना है उसके राज में रहिए और छप्पड़ में हाथी बुले,हां जी, हां जी कहिए’।

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