दूध के बाद सुधा लेकर आया ‘आइसक्रीम’

-नालंदा डेयरी में प्रोडक्शन शुरू

बिहारशरीफ।आइसक्रीम के शौकीनों के लिए एक अच्छी खबर है। डेयरी प्रॉडक्ट्स के लिए मशहूर सुधा दूध, घी व बटर के बाद 6 फ्लेवर में आइसक्रीम लेकर आया है। नालंदा डेयरी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी एके सिंह ने बताया कि हम अपने प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए अगले सीजन तक और भी फ्लेवर लांच करेंगे।अभी डिमांड के हिसाब से प्रोडक्शन किया जा रहा है। वैनिला,स्ट्राबेरी,बटर स्कॉच की कई रेंज मार्किट में उपलब्ध है। नालंदा डेयरी में बनी आइसक्रीम फिलहाल नालंदा व बोकारो की मार्किट में उपलब्ध है। नालंदा में हर तीन दिन में 80 हज़ार से एक लाख की खपत है जबकि बोकारो में 10 से 12 दिनों पर एक लाख की आइसक्रीम की खपत हो रही है।कुछ नए मशीन भी लगाने होंगे।बता दें कि नालंदा पैक्ड मिल्क नालंदावासियों से लेकर सियाचीन व लद्दाख के जवानों में पहले से ही दम भर रहा है।लेकिन आइसक्रीम के प्रोडक्शन से एक नया बाजार उपलब्ध होगा।
पड़ोसी व पूर्वोत्तर राज्यों के मिल्क मार्केट पर नालंदा डेयरी ने पहले ही आधिपत्य जमा चुका है।ऐसे में आइसक्रीम के फ्लेवर पर भी इसका कब्ज़ा होगा। श्री सिंह ने बताया कि यह तेजी से बढ़ने वाली प्रॉडक्ट कैटेगरी है। हम चाहते हैं कि नए प्रॉडक्ट्स के साथ हम इस कैटेगरी को भुना सकें। दूध से जुड़े उत्पादन के बारे में उन्होंने बताया कि नालंदा के टेट्रा पैक्ड मिल्क को बिना फ्रीजिंग के सामान्य तापमान पर 180 दिनों तक रखा जा सकता है। यहां रोजाना चार से साढ़े चार लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग होती है। इसके कारण भारत की सीमाओं की रक्षा में जुटे जवानों को उपयोग में आसानी होती है। सिक्स लेयर्ड पैकिंग के कारण इसे एक से दूसरी जगह ले जाना भी काफी आसान होता है। सियाचीन क्षेत्र की एजेंसी एक लाख लीटर दूध यहां से ले जाती है।इसको लेकर डेयरी के उत्पादों को परखने असम सरकार के अधिकारी अरुण गोगोई भी आ चुके है।बता दें कि टेट्रा पैकिंग के कारण इसका संरक्षण काफी आसान तो है ही, स्वाद व गुणवत्ता में भी अन्य की अपेक्षा काफी बेहतर है। सियाचीन व लद्दाख जैसे दुर्गम स्थलों पर भेजने के लिए विशेष तरह के वाहन का उपयोग किया जाता है।बिहार की सभी डेयरियों के अलावा ओडिसा व झारखंड की डेयरियों को नालंदा डेयरी स्थायी बाजार दिलाने में मदद कर रही है। उन डेयरियों के पास जब दूध की अधिकता होती है तो उसे नालंदा भेज दिया जाता है। यहां उस दूध से पाउडर बना लिया जाता है। जब वहां दूध की कमी हो जाती है तो नालंदा डेयरी पाउडर से दूध बनाकर उसकी पूर्ति करती है। 1.28 अरब से बनी नालंदा डेयरी पूर्वोत्तर भारत की इकलौती फुली ऑटोमैटिक डेयरी है। दुग्ध वाहन से दूध उतारने से लेकर पैकिंग करने तक का काम सिर्फ मशीनों से होता है।

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