हट, देखता नहीं सेल्फ़िया रहे है…

पंडित जी, देखिए न मेरा बेटा और छोटी वाली बेटी को क्या हुआ है,हर समय फोटो खींचती रहती है।माते आपके बच्चों की कुंडली में सेल्फी दोष है।इसके लिए क्या करना होगा स्वामी।कुछ नहीं 108 बार आंख बंद करके ‘न सेल्फी,न मृत्युयाय नमः’ का जाप करें।जाप खत्म होने के बाद मोबाइल को सामने रखकर चूर दे।कल्याण होगा

रजनीकांत।अच्छा खासा शक्ल रामु चाय दुकान वाले की तरह दिखने लगी है।तरह तरह से मुंह का एंगल मुस्कुराते हुए,चिड़चिड़ाते हुए,झुंझलाते हुए देखता था पुलपर।उस समय सेल्फी नहीं थी,मोबाइल भी बिना कैमरा वाला।5 रुपया 40 पैसा इनकमिंग व उतने पैसे ही आउटगोइंग में लगते थे।किसी ने फ़ोन कर दिया तो खून सूखने लगता था,बगल वाले पीसीओ में जाकर 2 रुपये में बात कर आता था,मज़बूरी होती तो शार्ट कट में बात कर प्रणाम-पाती कर लेता था।वक्त बीत गया,सब कुछ अंबानी जी की देन से सस्ता हो गया।भैया जी,स्माइल सिमट कर मोबाइल में आ गया,और धीरे धीरे आजा सेल्फी ले ले रे,वाला स्टाइल आ गया।सेल्फी भी एक योग है,जय हो सेल्फी बाबा की।लड़कियों पर तो सेल्फी का वियोग ज्यादा है।फेसबुक पर अजीबो गरीब तरह की शक्ल में दिख जाती है।पहले तो लगता था कि फेस की कोई बीमारी है जो बताना चाहती हो कि देखकर बताओ कि ठीक कैसे होगी।बाद में पता चला या बीमारी नहीं सेल्फी है।धीरे धीरे सभी ने सेल्फी धर्म अपना लिया।नया कंट्रास्ट दिखा इस धर्म में।लड़कों ने सेल्फी योग में ज्यादा ध्यान दे दिया।मॉडल,एक्टर,ही-मैन,टार्जन,वंडर बॉयज,शक्तिमान सभी रूप में आने लगे।जैसे आम जीवन में मोक्ष की प्राप्ति के लिए अध्यात्म व साधना की ज़रूरत है,वैसे ही सेल्फी धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए सेल्फी की साधना की ज़रूरत है ताकि आप बिना कहे इस दुनिया से सेल्फी लोक तक पहुंच सके ,ज्यादा बैठे धर्मराज आपकी बेबकूफी की एक एक फोटो आपको दिखा सके जो आपने मरने से पहले ट्रेन के सामने आकर,पहाड़ की चोटी पर चढ़कर,बाइक पर स्टंट कर आपने थोबड़े को सामने कर खिंचवाई थी।अच्छा हुआ कि मुझे सेल्फी लेनी नहीं आती नहीं तो टेनिस एल्बो हो जाती।कार्यक्रम में जाता हूँ तो लोग लगते है धकियाने,हटिए न,सामने काहे खड़े है,देख नहीं रहे सेल्फ़िया रहे है।ई इतना बड़ा बीमारी है कि अब बड़ा बड़ा शोध होगा,बाई गॉड।

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