आर्मी कैंप पर हमला,10 जवान शहीद! दशहरा में गयी 33 लोगों की जान!अनुष्का का पैर हुआ भारी!

भाई हम तो हेडिंग से ही परेशान हैं।जब खबर खोलकर देखिए तो आर्मी कैंप पर हमला इज़राइल का होगा,दशहरा में 33 लोगों की जान पिछले साल की होगी और अनुष्का का पैर भारी कपड़े के बजन से हुआ होगा।सर्जिकल स्ट्राइक से तो आतंकी मरेंगे,मगर कुछ चैनल व न्यूज पोर्टल देखने व पढ़ने से हमारी सोचने की शक्ति मर जाएगी । पता नहीं इन लोगों का सूत्र है की सुतरी,खत्म ही नहीं होता। मगर दिमाग मानना पड़ेगा बॉस,टीआरपी व सेंसेशन फैलाने में इनका कोई जोड़ा नहीं है।किस एक्टरेस को किस एक्टर के बेड रूम तक पहुँचा देगा पता नहीं।अब तो न्यूज साइट की जगह इनका नाम पोर्न साइट होना चहिए।अश्लीलता परोसने का ठेका अब न्यूज साइट्स ने ले रखा है ।कौन सा सामाजिक दायित्व निभा रही है मीडिया पता नहीं।इन सबको देखते हुए एक और नए प्रोपेगैंडा चैनल की आवश्यकता है।इनको बखूबी पता है जितना अश्लीलता परोसा जाएगा, उतना हिटस बढ़ेगा। किसी नेता या अधिकारी को क्या भ्रष्ट कहें जब हम ही प्रोपेगैंडा की दलाली करते हों। मुझे पता है इस्के बाद कुछ लोग मुझे गरियायेगा,लेकिन फर्क नहीं पड़ता। पहले पुरस्कार  समाज और सरकार की व्यवस्था से लड़ने वाली ख़बरों को दिये जाते थे।मीडिया और सरकार-प्रशासन इतने करीब आ चुके हैं कि आप मीडिया की आलोचना नहीं कर सकेंगे। पॉजिटिव जर्नलिज्म करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। भारत की जनता को भी इसका श्रेय देना चाहिए। भारत की जनता भी पहली बार व्यवस्था समर्थक पत्रकारिता का साथ दे रही है। जनता भी पत्रकारिता के इस पतन पर ख़ामोश है। वो रोज़ ये तमाशा देख रही है लेकिन उसे पता ही नहीं कि वह इस तमाशे का हिस्सा बन चुकी है। कोई इस बहियात न्यूज़ का विरोध तक नहीं करती।

 

 

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