बूतों से दरक कर गांधी से मोहन को निकलते आज मैंने देखा है…

बूतों से दरक कर गांधी से मोहन को निकलते देखना है तो ज़रा इस क़िताब को पढ़िए। 1 से लेकर 85 पन्नों तक पढ़ने के बाद मोहन का जीवन आपके बच्चों के बचपन का हिस्सा हो जाएगा। बापू की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से लेकर चंपारण सत्याग्रह तक के सफर को शब्दों के माध्यम से जीवंत होता दिखेगा।बापू के कौन से विचार आपको या नयी पीढ़ी को ज्यादा प्रभावित करेगी या उससे आप कहां तक प्रभावित होंगे यह तो पढ़ने के बाद ही पता चलेगा। पर हर एक कहानी सोपान जोशी के आलेख व सोमेश कुमार के चित्र और सज्जा से निकल कर दौड़ते भागते और सहमते गांधी का मन समझने के लिए काफी है। इस किताब को बरसात खत्म होने से पहले युवा होते अपने बच्चों को पढ़ कर सुनाइए या पढ़ने दीजिए।जन शिक्षा निदेशालय ,बिहार सरकार के द्वारा इसका प्रकाशन किया गया है जो प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय के बच्चों तक शिक्षा विभाग पहुंचा रही है। आ तो गई थी पहले ही मगर डीईओ नालंदा मनोज कुमार से आज मिली। देखते ही आँखों में चमक पैदा हो गई। क्या किताब है। लाजवाब।गांधी को न भी जानो तो भी लगता है सब जान चुके हैं। थोड़ा भी जानो तो लगता है अब क्या जानना है। गांधी को जानना जयंती और पुण्यतिथि की तारीख़ को याद रखने में सिमट गया है। इस किताब में गांधी नए नए से लगते हैं।कहानी व चित्र और सज्जा अद्भुत हैं। जैसे गांधी को हम सब अपनी आँखों से चलते फिरते देख रहे हों ।डरपोक आजाद नहीं रहते कहानी से यह किताब अपना पहला क़दम बढ़ाती है। पहुँचती है ‘पार्टी बन गयी आंदोलन में ‘ जहाँ अंधेरे से डरने वाला बालक मोहन अब अपने देश को,अपने लोगों को अंधेरे से बाहर निकाल रहा था।आप इस किताब को पढ़िएगा। बच्चों के साथ और ख़ुद को बच्चा बनाए रखने के लिए।इस किताब का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी के विचारों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाना है। अगर गांधी जी के विचारों के प्रति लोगों के मन में आकर्षण पैदा हो जाए तो कितना परिवर्तन हो जाएगा। प्रत्येक स्कूल में गांधी जी पर कथा वाचन से बच्चों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। गांधी जी का जीवन ही उनका संदेश है। जो किया, जो कहा उसे करके दिखाया। ये नई पीढ़ी जान जाए, तो उनका जीवन सार्थक हो जाए।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके लिए बधाई के पात्र हैं।जिसका भी यह आईडिया रहा है उसने अपने जीवन में एक अच्छा काम किया है।

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