हवा ले ला हो…

-फॉग, स्मॉग और दिल्ली

-लोग समाधान नहीं,समान खोज रहे है

बिहारशरीफ। हवा हवा ऐ हवा खुशबू लुटा दे,कहाँ खुली हां खुली ज़ुल्फ़ बता दे ,अब उसका पता दे,ज़रा मुझको बता दे ,मैं उस से मिलूंगा, एक बार मिला दे यार मिला दे, दिलदार मिला दे। याद आया ‘चांदनी फ़िल्म’ का ये मस्त गाना जिसे दिल्ली वाले अक्सर गुनगुनाया करते थे। अब गुनगुनाओ। जो भी सुनेगा थपड़िया देगा।आज यही हवा से बचने के लिए तो दिल्ली में लोग एयर प्यूरीफायर लगा रहे है। हर ग्रुप में टाइट चर्चा है बॉस। दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो गया है।ओ,माई गॉड,कैसे मैं बाहर निकलूंगी। मेरा फिगर।
जब मना किया गया कि पटाखा मत छोड़ो,खराब गाड़ियों को हटाओ,प्रदूषण मत फैलाओ, पेड़ मत काटो तो कटकटा रहे थे। तब किसी ने नहीं सुना,अब नेचर नहीं सुन रहा। हवा को लेकर हाई फाई सोसाइटी से लेकर मिडिल क्लास व लो क्लास लोग सरकार को गरिया रही है। कोस रही है।सरकार ऐसे मुद्दों पर टेंशन नहीं लेती,दे देती है। ज्यादा अकबाकियेगा तो फिर कोनो हिन्दू मुस्लिम का राग अलाप कर सब हवा कर देगी।मार्केटिंग वाले दिल्ली पर अक्सर रीसर्च करते आए है। कंपनी जानती है कि यहां के लोग तथाकथित रूप से जागरूक होते है और जब होते है तो समाधान नहीं समान खोजते है। आजकल बाज़ार में भांति-भांति के एयर प्यूरिफ़ायर आ गए हैं। ख़राब हवा ने इन कंपनियों की हालत अच्छी कर दी है।लोग कहते है कहाँ है अच्छे दिन।लोग शुद्ध हवा बेच रहे है प्यूरीफायर की शक्ल में,अब इससे अच्छा दिन और क्या होगा।कोई नेता क्या कर लेगा। ज़्यादा से ज़्यादा दांत चियार कर कुछ बोल देगा कि हम देखेंगे, कुछ कर रहे हैं, क्या हम और आप नहीं जानते कि ऐसे बयानों का कोई मतलब नहीं होता है। टीवी पर डिबेट हो जाना भी आजकल जागरूकता का एक नया बेंचमार्क है। मूर्खता का ऐसा गौरवगान हमने कभी नहीं देखा। इसीलिए कोई असर नहीं। अंत मे इतना ही कहूँगा कि तंज सिर्फ दिल्ली पर नहीं है।दिल्ली के रास्ते यह हर राज्य पहुंचेगा।इसलिए चेत जाए और पर्यावरण को बचाएं।

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