कहीं जनादेश का अपमान न भारी पड़ जाए सपा परिवार पर ?

विकास प्रीतम।व्यक्ति और परिवार आधारित पार्टियाँ जब सत्ता की बागडोर संभालती हैं तो प्रथम दिन से ही उनकी प्राथमिकता परिवार होता है | इसके इतर उन्हें कुछ नजर भी नहीं आता | लोकतंत्र में सत्ता के माध्यम से लोक कल्याण की भावना भी परिवार विशेष की चारदीवारी में दम तोड़ देती है | देश के सबसे बड़े राजनैतिक सूबे उत्तर प्रदेश में भी इन दिनों कुछ ऐसे ही नज़ारे देखने को मिल रहे हैं जहाँ सैफई परिवार की कलह, झगड़ों और अंदरूनी खींचतान का सार्वजनिक प्रदर्शन बेशर्मी के साथ जारी है |चुनावी बेला में अमूमन सत्ताधारी दल अपने मतदाताओं के समक्ष अपने सम्पूर्ण कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है, उसका कार्यकाल पिछली सरकारों के मुकाबले किस प्रकार से बेहतर रहा यह बताता है लेकिन उत्तरप्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के क्षत्रप पार्टी पर कब्ज़ा करने के षड्यंत्रों में अपने तमाम दायित्व भूल गए हैं | कुनबा परस्त राजनीति का स्याह सच देखकर उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरा देश हैरान है |सपा की वर्तमान हालत पर आज राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र जैसे नेताओं की आत्माएं कहीं फूट-फूट कर जरूर रोती होंगी | समाजवाद को उत्तर प्रदेश में सैफई परिवार की निजी सम्पत्ति बनाने वाले मुलायम सिंह आज दोराहे पर खड़े हैं | जहाँ एक तरफ भाई है तो दूसरी तरफ बेटा | नेताजी की ढलती उम्र और क्षीण होती स्मरण शक्ति के बीच भाई और बेटे में उनके असल राजनैतिक उत्तराधिकारी बनने के लिए घमासान मचा हुआ है | आपसी कलह और कटुता इस हद तक बढ़ गई है कि नवम्बर में पार्टी की स्थापना की रजत जयंती समारोह के आयोजन पर स्वयं उस पार्टी के मुख्यमंत्री नदारद रहेंगे | उन्होंने दो दिन पहले अपना चुनावी रथ हांकने की घोषणा कर दी है | सपा के इस तमाशे में एक रोचक पहलू उस वक्त जुड़ गया जब सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अगली सरकार में भी सी.एम. की कुर्सी का गारंटी का ऑफर स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने का एलान किया | मानो देश में अभी भी राजे-रजवाड़ों का दौर हो और जनता महज जयकारा लगाने वाली कठपुतली |परिवार की नूरा कुश्ती का असर प्रदेश की सरकारी मशीनरी पर हो रहा है जो इस समय दिशाहीन और पंगु हो चुकी है | लखनऊ में सत्ता के एक से अधिक केंद्र बन चुके हैं | प्रदेश के हित में नीतियां एवं योजनाओं पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है | उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भ्रमित हो रहे हैं उन्हें सूझ नहीं रहा है कि किसके पीछे जाएँ | इस अप्रिय स्थिति को निर्मित कर सपा ने राज्य की जनता के विश्वास को भंग करने का गुनाह किया है | दरअसल विचारधारा और सिद्धांतों से विमुख, व्यक्ति केन्द्रित राजनीति करने वाली पार्टियाँ एक न एक दिन इस हश्र को जरूर हासिल होती हैं | जिन पार्टियों के समक्ष सत्ता का भोग और उपभोग ही अंतिम लक्ष्य होता है उनमें देश और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी का भाव पनप ही नहीं पाता है |प्रदेश में राज्य सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा एवं आक्रोश है | वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं | जनादेश का अपमान सपा पर भारी पड़ने वाला है | आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता के पास फर्जी समाजवादियों से छुटकारा पाने का सुनहरा अवसर है और मेरा दृढ़ विश्वास है कि प्रदेश के जागरूक मतदाता इस बार विकास की बयार के साथ चलेंगे ।वे कमल के साथ चलेंगे ।

( यह लेखक के निजी विचार है )

Top
Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.