नालंदा के साहित्यकार अब्दुल कवि देशनवी को गूगल ने बनाया डूडल

-अपनो ने भुलाया,गूगल ने अपनाया

बिहारशरीफ। जिला मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित देशना गांव आज एक बार फिर चर्चा में है। बुधवार को उर्दू के प्रख्यात लेखक अब्दुल #कवि देशनवी का 87वां जन्मदिन था जिसे #गूगल ने बड़े ही शानदार तरीके से मनाया ।अब्दुल कवि देशनवी को गूगल ने अपना डूडल बनाया , जिस पर क्लिक करते ही लोगों को अब्दुल कवि देशनवी के बारे में पूरी जानकारी मिली।खासकर नालंदा के नयी पीढ़ी को।ऐसे महान सख्सियत की जानकारी गूगल को हुई लेकिन अफसोस सरकार व स्थानीय प्रशासन को पता भी नहीं चला।नालंदा के अस्थावां प्रखंड के देसना गांव में जन्मे अब्दुल कवि देशनवी ना सिर्फ उर्दू के महान लेखक थे बल्कि वो साहित्य के क्रिटिक और साहित्यकार भी थे।उनका जन्म 01 नवंबर 1930 को हुआ था। 8 जुलाई 2011 में उनका निधन भोपाल में हुआ। उनका पूरा परिवार आज भी भोपाल में ही रहता है।उन्होंने उर्दू साहित्य पर कई किताबें लिखीं जिनके लिए उन्हें कई अवॉर्ड भी मिले। वैसे तो अब्दुल कवि देशनवी का पूरा लेखन ही अपने आप में अद्भुत था लेकिन मौलाना अबुल कलाम आजाद, मिर्जा गालिब और अलामा मोहम्मद इकबाल जैसी महान शख्सियतों के लिए किया गया उनका लेखन कार्य खूब चर्चित रहा।अब्दुल कवि देशनवी उर्दू, अरबी और फारसी भाषा के प्रोफेसर रहे सइद मोहम्मद सईद मिर्जा के बेटे थे। आज के दौर के कई विद्वान, कवि और टीचर अब्दुल कवि देशनवी के स्टूडेंट रहे हैं। इनमें मशहूर लेखक #जावेद #अख्तर का नाम भी शामिल है। देशना गांव के ही रहने वाले मोइन देशनवी ने बताया कि वे काफी शांत स्वभाव के व्यक्ति थे।चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रहती थी। वे जब भी गर्मी के छुट्टियों में गांव आते,बच्चों के ही होकर रह जाते।मुझे आज भी याद है वे हमेशा सुबह में सभी बच्चों को लेकर एक्सरसाइज कराने निकल पड़ते।मैं खुद भी रहता था।फिजिकल फिटनेस पर उनका विशेष ख्याल रहता था।अब्दुल कवि देशनवी ने शुरुआती तालीम गांव से की,बाद में आरा से पढ़ाई करने के बाद मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी की। 1961 में सैफिया पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज का उर्दू डिपार्टमेंट जॉइन कर लिया। यहां वो 1990 तक कार्यरत रहे।1990 में रिटायर होने के बाद अब्दुल कवि देशनवी को कई उपाधियों से नवाजा गया जिनमें मध्य प्रदेश उर्दू अकेडमी के अध्यक्ष से लेकर सैफिया पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में अतिरिक्त प्रधानाचार्य जैसे पद शामिल हैं।देशना में जन्मे इस्लामिक स्कॉलर सुलेमान नदवी के परिवार से इनका ताल्लुक रहा।देशना गांव अल-इस्लाह-उर्दू लाइब्रेरी के लिए काफी प्रसिद्ध रहा जिसे देखने भूतपूर्व राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद भी पहुंचे थे। आज भी खुद बख्श लाइब्रेरी में देशना सेक्शन मौजूद है।अब्दुल कवि देशनवी तीन भाई थे।दोनों भाई बलि नवी,मोहिद नवी का भी इन्तिक़ाल हो चुका है। कभी कभी इनके बच्चे देशना गांव ज़रूर आते है। बगल के ही मो.सलाउद्दीन बताते हैं कि अब्दुल कवि देशनवी काफी मिलनसार थे।बता दें कि अब्दुल कवि देशनवी ने कई पदों को सुशोभित किया जिसमें प्रदेश उर्दू अकादमी सचिव, (भोपाल) ,निर्वाचित सदस्य मजलिस-ए-आमा, अंजूमन तरक्की उर्दू (हिंद) ( नई दिल्ली),सदस्य, अखिल भारतीय अंजुमन तरक्की उर्दू बोर्ड, (नई दिल्ली), कार्यक्रम सलाहकार समिति सदस्य, अखिल भारतीय रेडियो, (भोपाल),सदस्य कार्यकारी परिषद, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (भोपाल) , बोर्ड ऑफ स्टडीज- उर्दू, फारसी और अरबी के अध्यक्ष, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (भोपाल), कला के डीन फैकल्टी, बरकातुल्लाह विश्वविद्यालय (भोपाल), कार्यकारिणी सदस्य, ताज-उल-मसाजिद (भोपाल) शामिल है।

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