अब तो पॉलिटिकल टूरिज्म को एन्जॉय करें नेता जी !

रजनीकांत।राजनीति को वैसे संभावनाओं व अनिश्चितता की दुनिया कही जाती है,जहां हर दिन नए नए प्रयोग से एक सफल ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स बाहर निकलते है।प्रयोग तो हम भी कर रहे है।कुछ वर्षों से टीवी पर चल रहे डिबेट्स व घटनास्थल पर नेताओं की जाने की होड़ ने एक नए टर्म को

चिट्ठी न कोई संदेश,जाने वो कौन सा देश…

ऐ डाकिया बाबू,क्या है री, छः महीना होई गवा ख़त नहीं आया।बोल क्या लिखूँ।डाकिया डाक लाया,कुछ याद आया।ट्रिंग, ट्रिंग,ट्रिंग।कैसे सायकल की घंटी बजते ही भाग कर गेट पर जाता था कि मेरी चिट्ठी आयी है।अब तो कभी कभी फिल्मों में ही दिख जाती है या सुनने को मिल जाती है।संदेशे

लाइब्रेरी:किताबों की मोहब्बत डिजिटल मत बनने दो बॉस !

पता नहीं लाइब्रेरी में रखी किताबों की मोहब्बत में 'डिजिटल' नाम की सौतन की एंट्री कब हो गयी।कौन सा टोना टोटका कर दिया कि लाइब्रेरी जैसे जीवन से आउट ही हो गया है।कभी गलती से भी मन कर जाए तो दोस्त पूछते हैं,कहाँ जा रहे हो?लाइब्रेरी। वहां क्या रखा है।

हट, देखता नहीं सेल्फ़िया रहे है…

पंडित जी, देखिए न मेरा बेटा और छोटी वाली बेटी को क्या हुआ है,हर समय फोटो खींचती रहती है।माते आपके बच्चों की कुंडली में सेल्फी दोष है।इसके लिए क्या करना होगा स्वामी।कुछ नहीं 108 बार आंख बंद करके 'न सेल्फी,न मृत्युयाय नमः' का जाप करें।जाप खत्म होने के बाद मोबाइल

‘मॉब लिंचिंग’ इज ‘पिनचिंग नाउ’ !

रजनीकांत।सोशल मीडिया पर इधर कुछ दिनों से जुनैद व अयूब पंडित की भीड़ के द्वारा की गई हत्या को लेकर काफी डिबेट चल रहा है।हर कोई अपने अपने हिसाब से लॉजिक गढ़कर एक परसेप्शन तैयार करने की कोशिश कर रहा है।यह ठीक नही है।भारत में आये दिन सामने आ रही

www. बत्तख. com और खबरों की पक-पक

बिहारशरीफ।अब बहुत हो गया,कइयों ने अपनी टीआरपी बटोर ली।आज www. बत्तख. com का जिक्र होना चाहिए भारत में।पूरा भारत को पकपक करना सीखा दिया है।किसकी बीबी कब तलाक लेगी,नीतीश कुमार कब भाजपा में जाएंगे,अभी अभी,टूट सकता है गठबंधन,ऐसी तमाम खबरों के सनसनीखेज तरीके से परोसने के चक्कर मे हिंदी पत्रकारिता

आडवाणी का दर्द,अगले जन्म मोहे वेटिंग ना कीजो…

- राम नाथ के आगे फेल हो गया राम रथ बिहार अभ्युदय।राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है,दुख तो अपना साथी है।अब इसी अहसास के साथ अशोका रोड बीजेपी के कार्यालय के ठीक सामने वाली सड़क पर देखना,कुंहासे में एक बुजुर्ग लाठी लेकर क्या करता है।यह बुजुर्ग कार्यालय की तरफ

हॉर्न हेरिटेज राज्य काहे नहीं घोषित कर देते…

बिहार अभ्युदय:पगला, बतलाहा,दिमागे सनसना दिया।ऐसे भी कोई अलबलाता है क्या।इतना हॉर्न कि कान का चदरा फाड़ देता।आधा लाइफ का इरिटेशन तो इन हॉर्न बजाने वाले गैंग ने कर दिया है।फ्रस्टेटिया गए हैं।कहाँ है एमवीआई वाले पदाधिकारी जो पूरे ईमानदारी से घूस का रुपया ले लेकर इनको लाइसेंस दे दिया है।किसी

पॉपुलैरिटी का ‘डायना’ कब सिस्टम को ‘डायन’ बना दे पता नहीं…

बिहार अभ्युदय।मुझे तो लगता था कि अगर कोई अधिकारी अच्छा करता है तो उनके सुपीरियर को खुशी होती होगी लेकिन मुझे क्या पता कि पॉपुलैरिटी का डायना किसी को डायन भी बना देती है।अरे,ये दूसरा ईमानदार आदमी कौन है जो मेरे से ज्यादा पॉपुलर हो रहा है।देखो,कुछ कमी दिखे तो

बागबान के दर्द को समझें,हर दिन फादर्स डे समझ में आएगा…

कार्यालय।बाग़ को जनम देनेवाला बागबान परिवार को जनम देनेवाला पिता, दोनों ही अपने खून पसीने से अपने पौधों को सींचते है, ना सिर्फ अपने पेड़ से, उसके साए से भी प्यार करते है, क्यूँ की उसे उम्मीद है ,एक रोज़ जब वो ज़िन्दगी से थक जायेगा, यही साया उसके काम

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