आडवाणी का दर्द,अगले जन्म मोहे वेटिंग ना कीजो…

– राम नाथ के आगे फेल हो गया राम रथ

बिहार अभ्युदय।राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है,दुख तो अपना साथी है।अब इसी अहसास के साथ अशोका रोड बीजेपी के कार्यालय के ठीक सामने वाली सड़क पर देखना,कुंहासे में एक बुजुर्ग लाठी लेकर क्या करता है।यह बुजुर्ग कार्यालय की तरफ मुड़ता भी है या यहीं अनंत काल तक खड़ा रहता है।कही लाठी की ठक-ठक से अब भी अपने होने की आहट तो नहीं सुनना चाहते।
सर,हम किसकी बात कर रहे है।कहीं वो बुजुर्ग आडवाणी जी तो नहीं है।क्या बात है मेरी स्क्रिप्ट के किरदार को इतनी जल्दी समझ गए।हां, वो आडवाणी जी ही हैं।उनकी चुप्पी हमारे समय की सबसे शानदार पटकथा है।जरा देखना स्क्रिप्ट में आंसू का जिक्र किया की नहीं।हां, सर प्रॉपर तरीके से किया है।मगर वो आंसू सबके सामने नहीं छलकेगा,पता नहीं अगर छलक गया तो कहीं कार्यालय में घुसने पर भी नो एंट्री न लग जाए। इस पटकथा को क्लाइमेक्स का इंतज़ार है।आडवाणी भी सोचते होंगे कि समय रहते अगर सभी को एक बार बागबान दिखाया होता तो आज यह दिन देखना नहीं पड़ता।क्या ऐसा कोई नहीं निकला जो मेरी बेइज्जती पर एक हाथ लगाकर पूछता कि तेरी हिम्मत कैसे हुई बाबू जी के इंसल्ट करने की,क्या कोई एक ऐसा घर नहीं बचा जहां मेरी तस्वीर लगाकर कहता कि मेरे लिए तो आप ही भगवान हो।सब कुछ खत्म हो गया सर।अब कुछ नहीं हो सकता।राम नाथ के आगे आपका राम रथ किसी काम का नहीं।आज आडवाणी जी की स्थिति वैसे अभिभावक की हो गयी है जो जिस मकान को जीवन भर बनाता है, बन जाने के बाद ख़ुद मकान से बाहर हो जाता है। वो आंगन में नहीं रहता है। घर की देहरी पर रहता है। सारा दिन और कई साल उस इंतज़ार में काट देता है कि भीतर से कोई पुकारेगा।लेकिन ऐसा नहीं है।लगता है आडवाणी जी की हर इच्छा की समाधि बनाना भी 2014 के बीजेपी के मेनिफेस्टो में शामिल था।वे अब पीएम इन वेटिंग से प्रेसिडेंट इन वेटिंग हो गये हैं।अब तो आपके चार धाम पर जाने की धमकी का भी असर नहीं रहा।एक गुनाहगार की तरह देहरी पर बैठकर किसका इंतिज़ार कर रहे है साहब।घर जाइये,फोन का इंतिज़ार कीजिये कि गलती से घंटी बज जाए और कोई आपका हाल चाल पूछ बैठे।अब तो एकांत में बैठकर सिसकते भी होंगे तो डर से बापस बैठ जाते होंगे कि कोई गलती से जान न जाए कि आडवाणी जी सिसक रहे हैं।बीजेपी का यह संस्थापक विस्थापन की ज़िंदगी जी रहा है।लेकिन एक दिन आडवाणी ही हम सभी की नियति है,याद रखना।

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