पॉपुलैरिटी का ‘डायना’ कब सिस्टम को ‘डायन’ बना दे पता नहीं…

बिहार अभ्युदय।मुझे तो लगता था कि अगर कोई अधिकारी अच्छा करता है तो उनके सुपीरियर को खुशी होती होगी लेकिन मुझे क्या पता कि पॉपुलैरिटी का डायना किसी को डायन भी बना देती है।अरे,ये दूसरा ईमानदार आदमी कौन है जो मेरे से ज्यादा पॉपुलर हो रहा है।देखो,कुछ कमी दिखे तो बताना, पहली फुर्सत में साहब को मिसलीड कर आते हैं।ऐसा ही मैंने 9 साल की पत्रकारीय जीवन में महसूस किया।अच्छा आईएएस व आईपीएस अगर सही में अच्छा करना चाहे तो उसे गलत तरीके से वाचने वाले सीनियर बैठे रहते है।अपने टेन्योर में राम राज्य तो ला नहीं पाए दूसरे के काम में सीधे जलन का गैस फैलाये हुए रहते है जिसे कोई भी पॉजिटिव बरनोल अच्छा नहीं लगता ।जलन का भी एक अलग मजा है,जिसके पेट में चला गया वो हर जगह फूंकता दिखेगा।पटना के दरबार में तो राजा से लेकर मंत्री व मंत्री से लेकर सेनापति भी बैठे है,फिर भी क्राइम नहीं रुकता।जलन में बैठे लोग दुर्योधन की तरह है जो भीम रुपी अच्छे अधिकारी के मोरल को मारने में लगे रहते है और उनका साथ डायन रूपी सकुनी देते है।थोड़ा महाभारत काल के फ़्लैश बैक में जाइये।दुर्योधन भीम को मारने की योजनायें बना रहा था, पर कामयाब नहीं हो पा रहा था। इस पर मामा शकुनी ने उसे समझाया कि ये काम महल के बाहर ही हो सकता है।एक दिन, शकुनि ने दुर्योधन को सलाह दी, ‘ऐसे काम नहीं बनेगा। अगर हम उसे महल के बाहर मारने की योजना बनाएं, तो वहां हम जो करना चाहेंगे, वह ज्यादा आजादी के साथ कर पाएंगे। महल में तुम्हें उसे चालाकी से मारना होगा, मगर तुम्हारा चचेरा भाई इतना शक्तिशाली है, कि उसे ऐसे मारना मुश्किल है।’ उसने आगे कहा, ‘शब्दों का इस्तेमाल सिर्फ दिल के भाव को व्यक्त करने के लिए ही नहीं किया जाता, बल्कि मन में चल रही बातों को छिपाने के लिए भी किया जाता है। भीम से दोस्ती करो। उससे प्रेम के साथ पेश आओ। उसके साथ कुश्ती मत लड़ो, उसे गले लगाओ। उसे गुस्से से मत देखो, मुस्कुरा कर देखो। वह मूर्ख है, तुम्हारी बातों में आ जाएगा।’इस तरह एक बहादुर, निर्भय और एक सीध में सोचने वाला दुर्योधन धोखेबाज और छली बन गया। उसके अंदर हमेशा से जलन, नफरत और गुस्सा तो था, मगर धोखेबाजी उसे शकुनि ने सिखाई। इसके बाद दुर्योधन ने पांचों भाइयों, खास तौर पर भीम से दोस्ती कर ली। उन सभी को लगा कि दुर्योधन का हृदय परिवर्तन हो गया है, और वह उनसे प्रेम करने लगा है। सिर्फ सहदेव, जो पांचों में सबसे बुद्धिमान था, इस झांसे में नहीं आया और उसने दूरी बनाए रखी।लेकिन बिहार के इस सियासत के सहदेव ‘सीएम साहब’ को समझ पाना किसी के बस में नहीं है जो झांसे में नहीं आते।उनका अपना तंत्र इतना स्ट्रांग है कि न जाने कितने सकुनी को उठाकर दरबार से फेंक सकते है।
नफ़ासत का ओढ़ा हुआ पुलिंदा मुझे भी दिख रहा है।सो कॉल्ड ईमानदार शख़्स की बखान पहले ऐसे की जाती थी मानो दरबार की सीढ़ियों से शख़्सियतें उतर रही हों ।उस वक़्त सोशल मीडिया नहीं था,आज है।एक दरबार में तो इंसान सफल भी हो जाएगा,महाकाल के दरबार मे तो सीधे न्याय होता है।कहीं ऐसा न हो कि दूसरे का गड्ढा खोदते खोदते तो खुद धंस जाएं।
ऐसा नहीं है कि यह सब कुछ अधिकारियों के साथ ही होता है।हमारे साथ भी होता है।मुझे ऐसा लगता है कि कोई मुझे उन नामों के बीच बाँध कर ले जाने आया है । मैं कहां गया और किससे मिला इसमें कुछ की दिलचस्पी कमाल की है। कहीं जाता हूँ ऐसा लगता है कि कोई निगाह रख रहा है । यार दोस्तों को बताता हूँ तो सब सतर्क रहने को कहते हैं । वो मेरा प्राइवेट स्पेस है । आजकल कई लोग ऐसी धमकियाँ देते हैं । उन्हें लगता है कि मैं कुछ फ़ेमस हो गया हूँ और वे मुझे मेरे ‘नाम’ का डर दिखा देंगे । उन्हें नहीं मालूम कि मै ऐसी लोकप्रियता पर रोज़ गोबर लीप कर सो जाता हूँ । हँसी आती है ऐसी बातों पर । घंटा । ऐसे लोग और ऐसी डरों को डंडा से रगेद देता हूँ । चिन्ता मत कीजिये यह तथाकथित लोकप्रियता मेरे लिए कबाड़ के बराबर है । कुछ और कीजिये फंसाने के लिए ।अब तो मैं अंदेशों की आहट समझ लेता हूँ।

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