बड़ा गहरा तअल्लुक है सियासत में विरोध के नाम पर गुंडागर्दी का ,किसी का खून गिरता है तो राजनीति मुस्कुराती है…

रजनीकांत।कभी इन सियासत की गलियों में विरोध भी शालीनता की चादर में ढकी होती थी ताकि समाज मे संदेश अच्छा जाए कि लोकतंत्र जिंदा है और कानून पर विश्वास अभी बाकी है।लेकिन कल जो पटना की सड़कों पर हुआ ,मेरी नजर में वो किसी एक दल की गुंडागर्दी नहीं थी बल्कि गुंडागर्दी की दलदल में सभी पार्टी की परिपाटी थी।जब जिसे मौका मिला उसने वही किया जो कल राजद ने किया।कल हुई अफरातफरी बता रही है कि यहा गुंडागर्दी का नंगा खेल खेला गया था और सियासतदार से लेकर प्रशासन तक मूक दर्शक बनी रही।दोनों तरफ से जमकर मारपीट हुई,पत्थर चले और जानकारी तो यहां तक मिली कि बीजेपी दफ्तर से शराब की बोतलें फेंकी गई।लाठी-डंडे से लैस राजनीति के सभ्य कार्यकर्ता कल गुंडों की तरह आपस मे टकराने के लिए तैयार थी।किसी ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री का बयान आया है कि अगर सब्र नहीं रखते कार्यकर्ता तो लाशों की ढेर लग जाती।अरे,नहीं,नहीं सर।यह गुस्सा बचा के रखियेगा, बॉर्डर पर काम आने वाला है।यह घटना इनकम टैक्स के द्वारा किए गए एक्शन का रिएक्शन था। आयकर विभाग द्वारा हुई छापेमारी की कार्रवाई के बाद राजद कार्यकर्ता काफी गुस्से में थे और इसी गुस्से में आकर बुधवार को  उन्होंने बीजेपी कार्यालय पर हमला बोल दिया। ऐसा ही एक मामला आपको याद होगा कि पश्चिम बंगाल में रोज वैली चिट फंड घोटाले से जुड़े मामले में लोकसभा में टीएमसी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था तो उसके बाद क्या हुआ। पश्चिम बंगाल का राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ गया।इस गिरफ्तारी के बाद हाथापाई की घटनाएं हुईं। पत्थरों और ईंटों से लैस तथाकथित टीएमसी के तथाकथित कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में बीजेपी के दफ्तर पर हमला कर दिया था।करीब 15 से 17 बीजेपी के कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर आयी।विरोध लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। छापेमारी या गिरफ्तारी चाहे राजनीति से प्रेरित हो या न हो लेकिन इससे गुंडागर्दी को उचित नहीं ठहराया जा सकता है।19 अप्रैल को एक अखबार में खबर छपी थी कि पुणे स्थित बीजेपी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की।मामला पार्षद के स्वीकृत पद को लेकर था।कुछ लोग अस्पताल पहुंच गए।फरवरी में भी केंद्रीय मंत्री उमा भारती के भी दफ्तर में भी उन्हीं की पार्टी के लोगों ने तोड़फोड़ की थी।सपा, बसपा,कांग्रेस,मनसे, शिवसेना सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने भी समय समय पर अपने बाहुबल का परिचय दिया है।विरोध के नाम पर सड़कों पर गुंडागर्दी इन राजनीतिक पार्टियों के लिए कुछ नया नहीं है।

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