समय के साथ बदलना होगा गांधी के खादी को

बिहारशरीफ।जिस तरह चंपारण सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने पर बिहार में गांधी की विचारधारा को जन जन तक पहुंचाने की कोशिश की गयी अगर गांधी के खादी को भी सही तरीके से प्रस्तुत किया जाता तो आज गांधी का खादी हर घर के युवा पीढ़ी को ज़रूर आकर्षित करता। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनकी खादी का जो क्रेज स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के बाद के कुछ वर्षों तक रहा। वह क्रेज आज के माॅडर्न परिवेश में घटता जा रहा है।इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण इसकी ब्रांडिंग सही तरीके से न हो पाना है। खादी को प्रोमोट करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें ठोस पहल नहीं कर रही है।देश का शायद ही कोई जिला, अनुमंडल ऐसा होगा जहां खादी ग्रामोद्योग भंडार नहीं होगा।बिडंबना देखिए कि जिस गांधी के नाम पर राजनेता बड़ी बड़ी बात करते है उनके शरीर पर भी गांधी की खादी नहीं दिखती।इस बाबत जब हमने पुलपर स्थित खादी ग्रामोधोग की दुकान में कार्यरत अंशु यादव से बात की तो उन्होंने कहा कि बिक्री में कोई कमी नहीं आयी है लेकिन बदलते परिवेश में यह युवाओं की पसंद भी नहीं बन पायी।केंद्र व राज्य सरकार इसे सही ढंग से प्रमोट करे या इसकी ब्रांडिंग करे तो यह मार्किट में सभी को टक्कर दे सकती है। हाथ से बनने के कारण खादी टिकाऊ भी होती है।हाँ, मार्किट से थोड़ा मंहगा ज़रूर है क्योंकि इसे बनाने में मेहनत बहुत लगता है। हालांकि खादी के क्षेत्र में काफी बदलाव हुए हैं।जब तक वस्त्रों को आधुनिक लुक नहीं दिया जाएगा तब तक प्रयास सफल नहीं होगा। खादी का कपड़ा 150 रुपए से 500 रुपए तक में उपलब्ध है।बंडी 1000 से 2000 के रेंज तक उपलब्ध है।कम्बल की कीमत 1000 से 3000,स्वेटर 800 से 1800 रुपए की रेंज तक उपलब्ध है। कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं जींस के साथ खादी का कुरता व शर्ट पहनना पसंद तो करते हैं लेकिन उसकी आदत नहीं बना पा रहे हैं।कहने का अर्थ है कि विशेष अवसरों पर ही खादी वस्त्रों को पहनते हैं। आजकल के युवा मोटे कपड़े वाले खादी  के पैंट (आठ प्लाई वाले) का भी उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं को खादी के प्रति दिलचस्पी जगाने के जरूरत हैं।फैशन को लेकर युवा पीढ़ी कुछ ज्यादा ही संजीदा है। वक्त के साथ बदलते फैशन पर यह पीढ़ी न सिर्फ नजर रखती है बल्कि उसे अपनाने में भी देर नहीं करती।फैशन को लेकर युवा वर्ग में बड़ा क्रेज है। साथ ही खुद के लुक को स्मार्ट बनाने के लिये गंभीर भी। समय बदलने के साथ फैशन ट्रेड पर नजर रखना और उसे अपनाने की होड़ में यह सबसे आगे रहती है। टीवी सीरियल या सिनेमा में कोई भी नया फैशन आया नहीं कि युवाओं को इसे अपनाने में देर नहीं लगती। जाहिर सी बात है कि समाज में अपने आप को बनाये रखने के लिये जमाने के साथ चलना है। इस बात का भी डर है कहीं पिछड़ न जायें। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेन्द्र प्रसाद की माने तो युवाओं में आजकल जींस का का क्रेज बहुत ज्यादा है। युवाओं की मांग फैशन के हिसाब से होती है। लड़के हों या लड़कियां जींस की मांग सबसे ज्यादा है। अब ऐसे में खादी को जब तक मॉडर्न लुक नहीं दिया जाएगा तब तक ये युवाओं तक नहीं पहुंच पायेगी।

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