बाबा के आगे बेबस सरकार,गुंडागर्दी की हाइट !

कार्यालय।पंचकूला की सीबीआई कोर्ट द्वारा बाबा राम रहीम को बलात्कारी करार देने के बाद उनके लाखों समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। पंजाब और हरियाणा के अलग अलग इलाकों में हिंसा और आगजनी की खबरें हैं। पंचकूला में दो दिन से जमा डेरा समर्थक गुंडागर्दी और हिंसा पर उतारू हैं। जगह-जगह गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे हैं। पुलिस ने उपद्रवियों को काबू में करने के लिए फायरिंग की है। इस हिंसा में पंचकूला में अब तक दस से बारह लोगों के मौत की खबर है। पंचकूला में कर्फ्यू लगा दिया गया है, कोर्ट के आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया है। शहर में सेना की 6 टुकड़ियां तैनात की गई हैं। इस बीच राज्य में बिगड़ते हालात के मद्देनजर मनोहर लाल खट्टर कैबिनेट की आपात बैठक हो रही है।ऐसा ही कुछ मामला हरियाणा के हिसार स्थित सतलोक आश्रम के तथाकथित संत रामपाल की गिरफ्तारी के बाद भी हुआ था। देश में बाबाओं के बढ़ते प्रभाव पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गयी है।इससे पहले आसाराम ने भी गिरफ्तारी से बचने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाये थे। काफी हो-हल्ले के बाद पुलिस को उन्हें भी गिरफ्तार करना पड़ा था। आसाराम अब भी जेल में हैं।यह सिलसिला सिर्फ आसाराम और रामपाल पर ही खत्म नहीं होता, बल्कि इस कड़ी में और भी कई तथाकथित बाबा शामिल हैं।आधुनिकता के इस दौर में पहले की तुलना में लोगों का जुड़ाव धर्म की ओर अधिक बढ़ रहा है। इसकी वजह सामाजिक बिखराव, एकल परिवारों का बढ़ता चलन और तेज होती जीवन-शैली है। लोगों की इस परेशानी से बाबा वाकिफ हैं।इसी का फायदा उठा कर वे धर्म की आड़ में करोड़ों का साम्राज्य स्थापित कर लेते हैं।इसका मूल कारण है लोगों के बीच आनेवाली कई तरह की कठिनाइयां। आधुनिक होती जीवनशैली के कारण लोग कई नये तरह की समस्याओं से घिर रहे हैं। ऐसे में उनका झुकाव धर्म की तरफ होने लगता है।ये बाबा लोग ऐसे लोगों की भावनाओं को अच्छी तरह से समझते हैं और उसी अनुरूप प्रवचन सुनाकर उन्हें फौरी तौर पर संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं।इससे मिलनेवाली संतुष्टि के कारण ही कई और तरह के बंधन उत्पन्न होते हैं, जिनके चलते लोग ऐसे बाबाओं के चंगुल में फंस जाते हैं। इस तरह से बाबाओं के पास उनके भक्तों का एक भक्त-समूह तैयार हो जाता है।जाहिर है कि किसी भी समूह की अपने तरह की एक ताकत होती है। इसका मानसिक असर दूसरे लोगों पर भी पड़ता है और भक्तों की तादाद धीरे-धीरे और भी बढ़ती जाती है। यही नहीं,इससे लोगों में सुरक्षा की भावना भी उत्पन्न होने लगती है और वे धीरे-धीरे हर बात के लिए बाबाओं पर निर्भर हो जाते हैं।

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