पटरी से उतरी रेलवे की ‘इज्जत’ टिकट योजना

-प्रचार प्रसार के अभाव में गरीबों तक नहीं पहुंच पाया योजना का लाभ
बिहारशरीफ। रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना ‘इज्जत’ प्रचार प्रसार के अभाव में खुद पटरी से उतरती नज़र आ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों को एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रा करने के लिए यह योजना शुरू की गई थी, लेकिन इस योजना के बारे में ज्यादातर यात्रियों को जानकारी तक नहीं है। यहां तक कि रेलवे के अधिकारियों को भी इसकी पूरी जानकारी नहीं है। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले यात्रियों को सुविधा देने के लिए यह योजना बनायी गई थी।रेलवे द्वारा वर्ष 2009 में बीपीएल श्रेणी के रेल यात्रियों को सस्ती रेल यात्रा मुहैया कराने के उद्देश्य से “इज्जत टिकट योजना” की शुरुआत की गई थी। उस समय से अब तक बिहारशरीफ में 4 से 5 व्यक्ति प्रतिमाह के हिसाब से  पास बनते हैं।प्रचार प्रसार के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जाता है। एक होर्डिंग भी लगी थी जो आंदोलनकारियों के भेंट चढ़ गयी।इस पास के लिए मात्र 25 रुपए का भुगतान कर एक माह तक रोजाना150 किलोमीटर तक सफर किया जा सकता है। सफर करने के लिए किसी खास ट्रेन की कोई बाध्यता नहीं है। पास धारक पैसेंजर या एक्स्प्रेस किसी भी ट्रेन से यात्रा कर सकते हैं।इस योजना में जिनकी मासिक आय 1500 रुपए से अधिक नहीं है, उन्हें इसका लाभ दिया जाता है। सफर करने के लिए किसी खास ट्रेन की कोई बाध्यता नहीं है। पास धारक पैसेंजर या एक्स्प्रेस किसी भी ट्रेन से यात्रा कर सकते हैं।इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन फार्म के साथ आय व आवासीय प्रमाणपत्र, बीपीएल कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड की छायाप्रति के साथ संबंधित एसडीओ से अभिप्रमाणित कराकर सारे दस्तावेज़ स्ट्रेशन मास्टर के यहां जमा करने होंगे।पहले  क्षेत्र के सांसद या विधायक से उनके लेटर पैड पर लिखवाना पड़ता था। इसके साथ आय प्रमाणपत्र भी संलग्न होता था। इसी आधार पर रेलवे जनप्रतिनिधि द्वारा अनुशंसित व्यक्ति को पात्र मानते हुए पास जारी कर देता था।बिहारशरीफ़ रेलवे स्टेशन के बुकिंग क्लर्क मंज़रुल हक ने बताया कि गरीब यात्रियों को सस्ती रेल यात्रा उपलब्ध कराने के लिए यह योजना बनाई गई थी।प्रचार प्रसार के लिए अलग से कोई फंड नहीं मिलता है। जो आते हैं उन्हें  इसका लाभ दिलाया जाता है।टिकट काउंटर से जानकारी हासिल की जा सकती है।
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