धूमधाम से मनायी गयी चित्रगुप्त पूजा, भाई के दीर्घायु के लिए बहनों ने किया भैयादूज

बिहारशरीफ।चित्रांश परिवार की ओर से शनिवार को आदि कलमकार तथा लेखनकला के आविष्कारक भगवान चित्रगुप्त महाराज की विधि पूर्वक एवं पूरी आस्था के साथ पूजा अर्चना की गई। मौके पर चित्रांश परिवार के सदस्य मौजूद थे। इस मौके पर लोगों ने भगवान चित्रगुप्त के चित्र की पूजा की।बिहारशरीफ के महलपर स्थित भगवान चित्रगुप्त की स्थापित प्रतिमा के सामने कायस्थ जाती के लोगों ने पूजा अर्चना की वही अम्बेर मोहल्ले के पंच अंगनवा में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की गयी।
भगवान चित्रगुप्त के संबंध में मान्यता है कि ब्रह्मा जी की काया से उत्पत्ति होने की वजह से चित्रगुप्त को कायस्थ कहा जाता है।वह प्राणी समूह के शरीर में गुप्त भाव से व्याप्त हो कर शुभ व अशुभ कार्यों का निरीक्षण करते हैं और पाप व पुण्य का लेखा जोखा के आधार पर उनका न्याय करते हैं।कायस्थों की उत्पत्ति के संबंध में बताया जाता है कि ब्रह्मा सृष्टि के निर्माण के बाद 11 हजार वर्षों तक समाधि में लीन रहे। इस दौरान उनकी काया से श्याम वर्ण, कमल नयन, चार भुजाधारी, एक हाथ में असी, दूसरे में कालदंड, तीसरे में लेखनी, और चौथे में दवात धारण किये पुरुष को ब्रह्मा ने चित्रगुप्त का नाम दिया था और उन्हें धर्मराज पूरी में जीवों के शुभ अशुभ कार्यों का लेखा जोखा रखने की जिम्मेवारी दी थी।
दूसरी तरफ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भैयादूज जिले भर में पारंपरिक तरीके से मनाया गया। बहनों ने व्रत रखकर यम से भाई के दीर्घायु होने की कामना की। भक्तिभाव से गीत गाते हुए गोधन कूटा और भाई को बजरी खिलाया। चली आ रही परंपरा के अनुसार भाइयों ने बहन के यहां जाकर भोजन भी किया। बता दें कि भैयादूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। पुरानी कथाओं के अनुसार इस दिन स्वयं यमराज इस पृथ्वी पर अपनी बहन यमुना से मिलने आते हैं। यम को मृत्यु व न्याय का देवता कहा जाता है। बहनें यम से भाई के दीर्घायु होने की कामना करती है। और अपनी जीभ में रेंगनी का कांटा चूभोकर भाई के लिए दुआ मांगती है।गांव-गांव से लेकर जिला मुख्यालय में बहनों ने जगह-जगह सामूहिक रूप से गोधन कूटकर अपने भाईयों की भलाई के लिए भगवान से प्रार्थना की। बाद में बहनों ने भाईयों की आरती उतारकर उनका मुंह मीठा कराया। भाईयों ने भी बहनों को अपनी ओर से यथा संभव उपहार दिया। गोधन कूटते वक्त महिलाओं ने पारंपरिक सामूहिक गीत भी गाए। शहर में कई मंदिरों के प्रांगन में बहनों ने गोधन कूटकर अपने भाईयों की भलाई के लिए भगवान से प्रार्थना की। भैया दूज को लेकर सुबह से हीं घरों में उल्लास का माहौल कायम रहा। गांवों में भी भैया दूज को लेकर उत्साह का माहौल कायम था।

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