दो दिन का राष्ट्रप्रेम बनाम 363 की एल्फी, सेल्फी व प्रोफाइल पिक !

बिहारशरीफ।15 अगस्त को सनके थे अब 26 जनवरी को सनकेंगे।आज शाम से ही चौक चौराहों पर हम लोग प्योर हिंदुस्तानी हो जायेंगे।झंडो से दुकाने पटी दिखेंगी।कौन कितना बड़ा झंडा खरीदेगा यह तो गाड़ी के साइज या घर की छत व बालकोनी डिसाइड करेगी।अगर दिल डिसाइड करती तो हर दिन हिंदुस्तानी रहते।कैसे समझाएं देशभक्ति का संबंध तिरंगे के आकार से नहीं, जज़्बे से होता है।कल का दिन आज़ादी की महत्ता एवं उसे प्राप्त करने के लिए चुकाई जाने वाली कीमत का एहसास कराने के लिए काफी होगा।कल भी भाषण से सब झलकेगा।थोड़ा फ़्लैश बैक में चलिए,दिमाग के मेमोरी में रिवाइंड बटन डालिये और उस दौर का जिक्र जो संभवतः हर घर में बुजुर्ग लोग करते होंगे कि कैसे जब ”ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी” सुनने मात्र से ही आँखें नम हो जाती थी। आज हम सब देश की बात करते हैं लेकिन यह कभी नहीं सोचते कि देश है क्या? केवल कागज़ पर बना हुआ एक मानचित्र अथवा धरती का एक अंश! जी नहीं देश केवल भूगोल नहीं है वह केवल सीमा रेखा के भीतर सिमटा ज़मीन का टुकड़ा नहीं है! वह तो भूमि के उस टुकड़े पर रहने वालों की कर्मभूमी हैं, जन्म भूमि है, उनकी पालनहार है, माँ है, उनकी आत्मा है। देश बनता है वहाँ रहने वाले लोगों से, आप से, हम से, बल्कि हम सभी से।शायद आपको याद हो कि अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपने प्रथम भाषण में कहा था ”अमेरिका वासियों तुम यह मत सोचो कि अमेरिका तुम्हारे लिए क्या कर रहा है अपितु तुम यह सोचो कि तुम अमेरिका के लिए क्या कर रहे हो।” आज हम सबको भी अपने देश के प्रति इसी भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।चार्ल्स एफ ब्राउन ने कहा था ”हम सभी महात्मा गांधी नहीं बन सकते लेकिन हम सभी देशभक्त तो बन ही सकते हैं।स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्रता दिवस का मतलब ध्वजारोहण, एक दिन की छुट्टी और टीवी तथा एफएम पर दिन भर चलने वाले देश भक्ति के गीत बन गये हैं! थोड़ी और देश भक्ति दिखानी हो तो फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया में देशभक्ति वाली दो चार पोस्ट डाल लो या अपनी प्रोफाइल पिक में भारत का झंडा लगा लो। सबसे ज्यादा देशभक्ति दिखाई देती है ।लेकिन जब देश के लिए कुछ करने की बात आती है तो हम ट्रैफिक सिग्नलस जैसे एक छोटे से कानून का पालन भी नहीं करना चाहते क्योंकि हमारा एक एक मिनट बहुत कीमती है। गाड़ी को पार्क करना है तो हम अपनी सुविधा से करेंगे कहीं भी क्योंकि हमारे लिए कानून से ज्यादा जरूरी वही है। कचरा फैंकना होगा तो कहीं भी फेंक देंगे चलती कार बस या ट्रेन कहीं से भी और कहाँ गिरा हमें उससे मतलब नहीं है बस हमारे आसपास सफाई होनी चाहिये देश भले ही गंदा हो जाए! देश चाहे किसी भी विषय पर कोई भी कानून बना ले हम कानून का ही सहारा लेकर और कुछ ”ले दे कर” बचते आए हैं और बचते रहेंगे क्योंकि देश प्रेम अपनी जगह है लेकिन हमारी सुविधाएं देश से ऊपर हैं। इस सोच को बदलना होगा।

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