तालाब में धो रहे है बच्चे अपना भविष्य

बिहारशरीफ।पहले स्कूल में बच्चे झाड़ू भी देते थे और गुरु जी का कहना भी मानते थे। मार भी जमकर खाते थे लेकिन उफ्फ तक नहीं करते थे।यह तब था जब स्कूल व घर एक संस्कार शाला थी। अब स्कूल क्या है यह किसी से छिपी भी नहीं है। अब मारना भी अपराध है और काम कराना भी।अब फंड भी है और फैसिलिटी भी।मिड डे मील भी है और चापाकल भी।अब ऐसे में कोई बच्चा सब कुछ रहते भी तालाब में बर्तन धोए तो खबर है भाई।चंडी प्रखंड क्षेत्र के कई ऐसे स्कूल हैं, जहां खराब पड़े चापाकल को ठीक नहीं किया जा रहा। इसमें या तो हेडमास्टर रूचि नहीं लेते है या अगर रूचि भी लेते हैं तो पीएचईडी विभाग इसमें कोई हरकत नहीं करता। बच्चों की मजबूरी है कि मध्याहन भोजन खाने के बाद वह खाई, पोखरे और तालाब में जुठे बर्तन धोने जायें। प्रखंड के बेलछी पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय मोकिमपुर के छात्र पानी के अभाव में मध्याहन भोजन के बाद तालाब बर्तन धोने जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे तालाब में बर्तन धोते हैं। बराबर हादसे की संभावना बनी रहती है। इस स्कूल में पिछले दो साल से चापाकल खराब पड़ा है। बुनियादी सुविधाओं का भी स्कूल में अभाव है। बीमारी का डर है सो अलग।यह किसी एक स्कूल का मामला नहीं है। बीते शुक्रवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय गंगौरा के एक बच्चे के साथ बड़ा हादसा होते-होते बचा था। मध्याहन भोजन के बाद एक छात्र बर्तन धोने खाई में गया था, उसी दौरान खाई में गिर पड़ा था। हालांकि आसपास में ग्रामीण थें, जिन्होंने उसे सकुशल निकाल कर हादसा होने से टाल दिया।बीईओ बिन्दु कुमारी ने बताया कि कई स्कूल से चापाकल खराब होने की शिकायत आयी है। विभाग के पास इस मद में कोई राशि नहीं आती है। पीएचईडी को खराब चापाकलों की मरम्मति के लिए लिखा गया है।

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