जस का तस छापे झूठो का वेद वाक्य,नहीं तो आज गौरी,कल होंगे हम और आप

-जो जितना अच्छे तरीके से झूठ परोस सकता है वो सरकार व प्रशासन का पड़ोसी है,जिसने सच लिखा वो सबकी नजर में दोषी है।

पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से एक बार फिर देश में लोकतंत्र की बुनियाद और उसमें असहमत स्वरों की जगह को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है।अगर पत्रकारों का सच लिखना या दिखाना इतना नागवार गुजरता है तो कह क्यों नहीं देते कि भारत में अघोषित तानाशाही है। गौरी लंकेश ही क्यों,न जाने कितने पत्रकारों को सच लिखने की कीमत चुकानी पड़ी है।अगर आपको याद होगा तो 13 मई 2016 को सीवान में हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।ऑफिस से लौट रहे राजदेव को नजदीक से गोली मारी गई थी। मई 2015 में मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले की कवरेज करने गए आजतक के विशेष संवाददाता अक्षय सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघाट जिले में अपहृत पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जला दिया गया। उसी साल 2015 में ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया। साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान नेटवर्क18 के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गई।आंध्रप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एमवीएन शंकर की 26 नवंबर 2014 को हत्या कर दी गई। 27 मई 2014 को ओडिसा के स्थानीय टीवी चैनल के लिए स्ट्रिंगर तरुण कुमार की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई।हिंदी दैनिक देशबंधु के पत्रकार साई रेड्डी की छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में संदिग्ध हथियारबंद लोगों ने हत्या कर दी थी।महाराष्ट्र के पत्रकार और लेखक नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को मंदिर के सामने उन्हें बदमाशों ने गोलियों से भून डाला।रीवा में मीडिया राज के रिपोर्टर राजेश मिश्रा की 1 मार्च 2012 को कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी।मिड डे के मशहूर क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की 11 जून 2011 को हत्या कर दी गई। वे अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कई जानकारी जानते थे।डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाख आवाज बुलंद करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की सिरसा में हत्या कर दी गई,21 नवंबर 2002 को उनके दफ्तर में घुसकर कुछ लोगों ने उनको गोलियों से भून डाला।इन सभी का कसूर इतना था कि ये लोग बेबाक विचारों को अभिव्यक्त करने का उदाहरण बन गए थे, उनकी हत्या पत्रकारिता पर भी हमला है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसे हमले क्यों हो रहे हैं और सरकार चौथे स्तंभ को बचाने में नाकाम क्यों है।इसके पीछे का एक बहुत बड़ा कारण आज की मेनस्ट्रीम मीडिया का केंद्र सरकार,राज्य सरकार व जिला प्रशासन के द्वारा भेजे गए आकड़े व विज्ञप्ति को जस का तस वेद वाक्य की तरह फैलाना ।मेन स्ट्रीम मीडिया के लिए सरकार व प्रशासन का बोला हुआ वेद वाक्य हो गया है।कोई ग्राउंड रिपोर्टिंग नहीं करता और अगर करता है तो उसपर कोई न कोई केस लाद दिया जाता है ताकि वह उसी में परेशान रहे ।अब तो सच सुनने की ताकत किसी में नहीं है।स्वाभाविक है जिस प्रचलन को प्रशासन फॉलो कर रही है,वैसा ही रियेक्ट करेगी।

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